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केंद्रीय मंत्रियों ने ``सादगी'' और ``मितव्ययिता'' की धज्जियां उड़ाकर दफ्तर संवारने में लाखों रुपये फूंके

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कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के बहुत से मंत्रियों ने ``अपने दफ्तरों'' की सजावट पर सादगी और मितव्ययिता अभियान को धता बताते हुए लाखों रुपये फूंक दिये। उल्लेखनीय है कि संप्रग सभापति तथा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रोफेसर प्रणव मुखर्जी ने सभी केंद्रीय मंत्रियों, कांग्रेस पदाधिकारियों से वैश्विक आर्थिक संकट में सादगी-मितव्ययिता बरतने को कहा था। इसके ठीक विपरीत कुछ मंत्रियों-केंद्रीय वाणिज्य उद्योग मंत्री आनंद शर्मा,
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मोहनदास करमचंद गांधी

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भारत और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक ऐसे नेता थे, जिसने बिना किसी हथियार और हिंसा के एक पूरे देश को सविनय अवज्ञा के माध्यम से आज़ाद करा दिया। उनकी इस अवधारणा की नींव अहिंसा पर रखी गयी थी, जिसने पूरी दुनिया में नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता के प्रति के आंदोलनों को प्रेरणा दी। उन्हें आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। `
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पंडित मोतालाल नेहरू

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भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता तथा आज़ादी की लड़ाई के एक प्रमुख सिपहसालार रहे पंडित मोतीलाल नेहरू का जन्म कश्मीर के पंडित परिवार में ६ मई, १८६१ को गंगारामजी के यहां हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद के मीर सेंट्रल कॉलेज से उच्च शिक्षा ग्रहण की किंतु किसी कारणवश वह बीए अंतिम वर्ष की परीक्षा नहीं दे पाये। बाद में वह कैंब्रिज में ``बार एट लॉ'' के लिए पात्र घोषित हुए। कैंब्रिज से शिक्षा ग्रहण करने के पश्र्चात मोतीलालजी ने अंगरेज़ी अदालतों में वकील के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। उस समय उनका शुमार देश के सबसे महंगे वकीलों में होता था।
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कांग्रेस के एक सौ पच्चीस बसंत अपने पति के नक्शे-क़दम पर श्रीमती सोनिया गांधी

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सोनिया गांधी न केवल कांग्रेस अध्यक्ष हैं, बल्कि राष्ट्रीय परिदृश्य पर पहचान इस देश की सर्वप्रिय नेता की बनी है। कांग्रेस की एकता और नेहरू-गांधी परिवार के संस्कारों की झलक सोनियाजी में दिखती है, जो धर्मनिरपेक्षता से आप्लावित है। नेहरू-गांधी परिवार अकेला परिवार कहा जा सकता है जो धर्म, जाति, भाषा, नस्ल और क्षेत्र की संकीर्णता से पूर्णतया मुक्त रहा है।
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वीरांगना लक्ष्मीबाई

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में केवल पुरुषों ने ही अपने जीवन का बलिदान नहीं किया, बल्कि यहां की वीरांगनाआें ने भी घर से निकलकर साहस के साथ युद्धभूमि में शत्रुओं से लोहा लिया। उन वीरांगनाओं में अग्रणी थींं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई। उनका जन्म १९ नवंबर, १८३५ के दिन काशी के भदैनी क्षेत्र में मोरोपंत तथा भागीरथी बाई के घर हुआ। उनका नाम मणिकार्णिक रखा गया, परंतु प्यार से मनु पुकारा जाता था।
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गुलजारीलाल नंदा

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गांधीवादी विचारधारा के प्रखर विचारक और सादगीपूर्ण जीवन जीनेवाले गुलजारीलाल नंदा का जन्म ४ जुलाई, १८९८ को सियालकोट, पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वह स्वच्छ तथा पारदर्शी राजनीति के हिमायती रहे। भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के आकस्कि निधन के बाद वह पहली बार २७ मई, १९६४ को
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Sarovar Portico

श्री नंद किशोर नौटियाल जी

 

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