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गंगा किनारे बसा ऐतिहासिक नगर - कोलकाता पीडीएफ़ मुद्रण ई-मेल
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मंगलवार, 12 मई 2009 12:19
कोलकाता :भारत की महानगरी है। यह गंगा तट पर स्थित है। हावड़ा, सियालदह और दक्षिणेश्वर, ये रेलवे स्टेशन कोलकाता में ही पड़ते हैं। ५१ शक्तिपीठों में से कोलकाता एक शक्तिपीठ है। यहां सतीदेह के दाहिने पैर की चार अंगुलियां (अंगूठे को छोड़कर) गिरी थीं।

ठहरने के स्थान कोलकाता में बहुत सी संस्थाओं के कार्यालय हैं। होटलों में ठहरनेवालों के लिए व्यवस्था है ही, पर्याप्त धर्मशालाएं भी हैं।
तीर्थस्थल
कलकत्ता में सर्वमंगला, तारासुंदरी, श्रीसत्यनारायणजी, नवीन श्रीराम मंदिर, भूतेश्वर महादेव, श्री दाऊजी, श्री सांवलियाजी आदि मंदिर तो बहुत से हैं, किंतु जिन्हें तीर्थस्थलों में गिना जा सके, ऐसे प्रधान चार ही स्थान हैं - १. आदिकाली, २. काली, ३. दक्षिणेश्वर और ४. बेलूर मठ।


आदिकाली - यह कोलकाता में सबसे प्राचीन स्थान है। टालीगंज में ट्राम तथा बस के अड्डों से लगभग एक मील पर नगर से प्राय: बाहर यह देवी मंदिर है । मुख्य मंदिर नष्ट होने के बाद पुन: यह बना है,
इससे 

शिखरदार नहीं है। मुख्य मंदिर के दोनों ओर ऊंचे चबूतरे पर एक ओर पांच और एक छोर पर छ: मंदिर हैं। इनमें शिवलिंग हैं। इस प्रकार ये एकादश रुद्र मंदिर हैं। कोलकाता का शक्तिपीठ यही स्थान है।

काली मंदिर - कोलकाता का काली मंदिर अत्यंत प्रख्यात है। इसमें महाकाली की मूर्ति है। कुछ लोग काली मंदिर को ही शक्तिपीठ मानते हैं। देवी मंदिर के समीप ही नकुलेश्वर शिव मंदिर है।



दक्षिणेश्वर - कलकत्ता में दक्षिणेश्वर एक रेलवे स्टेशन ही है। यह स्थान गंगा किनारे है। यहां रानी रासमणि का बनवाया काली मंदिर है। मंदिर अत्यंत भव्य है। मंदिर के घेरे में चबूतरे पर १२ शिव मंदिर हैं। श्रीरामकृष्ण देव परमहंस ने यहीं महाकाली की आराधना की थी। मंदिर से लगा हुआ परमहंस देव का कमरा है, जिसमें उनका पलंग तथा दूसरे स्मृतिचिह्न सुरक्षित हैं। मंदिर के बाहर परमहंस की पूर्वाश्रम की धर्मपत्नी श्रीशारदा माता तथा रानी रासमणि का समाधि मंदिर है और वह वट वृक्ष है, जिसके नीचे परमहंस देव ध्यान किया
करते
थे।

बेलूर मठ - दक्षिणेश्वर के पास से गंगा पार होकर हावडा की ओर आने पर कुछ दूर पर गंगा किनारे बेलूर मठ है। इस मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंदजी ने की थी। श्रीरामकृष्ण मिशन का यहीं प्रधान कार्यालय है। यहां का श्रीरामकृष्ण मंदिर अत्यंत भव्य है। विशाल मंदिर में प्राच्य-पाश्र्चात्य कलाओं का मनोरम ऐक्य है। यहीं स्वामी विवेकानंदजी की समाधि भी है।
जैन मंदिर - यहां का प्रसिद्ध श्री पार्श्वनाथजी का जैन मंदिर बहुत ही सुंदर और दर्शनीय है। जैनियों के मंदिर भी हैं।
प्रसिद्ध महर्षि देवेंद्रनाथ ठाकुर, श्री केशवचंद्र सेन, स्वामी विवेकानंद, कवींद्र श्री रवींद्रनाथ ठाकुर तथा श्री चित्तरंजनदास आदि की जन्मभूमि कोलकाता ही है। यहां का हावड़ा पुल जग-प्रसिद्ध 
है।

विक्टोरिया मेमोरियल -
रानी विक्टोरिया की याद में बनाया गया विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता आनेवाले पर्यटकों के आकर्षण का खास केंद्र है। योरोपियन वास्तुकला में मुगल काल की शिल्पकलाओं का इस्तेमाल कर इसका निर्माण सर विलियम एमर्सन ने करवाया था। सफेद संगमरमर से बनी इस इमारत का निर्माण कार्य १९०६ से १९२१ तक चला। फिलहाल इस इमारत को संग्रहालय बना दे दिया गया है। 

अंतिम अद्यतन ( गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009 17:42 )
 


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