Home
मुंबई समाचार पीडीएफ़ मुद्रण ई-मेल
द्वारा लिखित Administrator   

काशीमीरा में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी
लोगों की जान खतरे में! पुलिस प्रशासन मौन!!
- नूतन सवेरा संवाददाता

मीरा रोड : काशीमीरा पुलिस स्टेशन की हद में जगह-जगह अवैध कच्ची शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है, लेकिन आश्र्चर्य की बात यह है कि पुलिस इस ओर से अनजान बनी आंखें मूंदे बैठी है। पुलिस की निष्क्रियता तथा कर्तव्य से विमुख होने के कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।काशीमीरा पुलिस स्टेशन के पास की झोपड़पट्टी तथा नेशनल प्लास्टिक कंपनी से लगी झोपड़पट्टी के कई घरों में जहरीली कच्ची शराब परोसने का कार्य देर रात तक चलता है। सूत्रों के अनुसार कुछ पुलिसकर्मी भी

यहां आकर शराब का लुत्फ उठाते दिखायी देते हैं। शराब का लुत्फ उठाने के साथ-साथ वह शराब का धंधा चलानेवालों से रुपये ऐठकर अपनी जेबें गर्म करते रहते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि यह धंधा पुलिस की छत्रछाया में उन्हें चढ़ावा चढ़ाकर ही हो रहा है, नहीं तो क्या मजाल है कि कच्ची शराब की बिक्री इस तरह सरेआम हो। एक स्थानीय शराब विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर हमारे संवाददाता को बताया कि स्थानीय लोग कई बार पुलिस से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है, जिससे लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार अवैध शराब का धंधा मुख्य रूप से जमाल भाई वीडियो सेंटर के बग़ल में, बाज डॉक्टर के बग़ल में, कालिया के यहां, बनवारी डॉक्टर के बग़ल में, लीला साइंर् धाम चोल, उत्तम में, सुरेश बसोड़े के यहां, तिवारी डॉक्टर के सामने तथा बाबू केबलवाला के पास और हनुमान मंदिर के बग़ल सहित कुछ अन्य जगहों पर भी धड़ल्ले से हो रहा है।
क्या काशीमीरा पुलिस को अतीत में हुए `खोपड़ी कांड' या हाल में हुए गुजरात के ज़हरीली शराब कांड जैसे किसी हादसे का इंतज़ार है, जिसमें कई लोगों की जान गयी थी? इस अवैध शराब से यहां के लोगों की जान को खतरा बना हुआ है। क्या राज्य का आबकारी शुल्क विभाग तथा पुलिस के आला अधिकारी इस ओर ग़ौर फरमाते हुए तुरंत इस अवैध शराब की बिक्री को बंद करवाने तथा निष्क्रिय और लापरवाह पुलिस अधिकारियों को दंडित करने की ज़हमत उठायेंगे?

मेंडोंसा ने आयुक्त को आड़े हाथों लिया

भायंदर : मीरा-भायंदर के उत्तन परिसर में घन कचरा प्रकल्प बंद करने की मांग को लेकर चल रहे उत्तनवासियों के आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया है। उत्तन में बनाये गये डंपिंग ग्राउंड को केमिकल डालकर दुर्गंध मुक्त करने की मांग पिछले आठ महीने से लगातार हो रही है। भयंकर बदबू तथा सड़ांध के कारण आसपास के निवासियों का जीना दूभर हो गया है। बदबू के कारण यहां के लोग घरों की खिड़कियां तथा दरवाजे नही खोल पाते हैं। इससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
गत लोगसभा चुनाव के वक़्त सांसद पद के प्रत्याशी संजीव नाईक ने भी इस समस्या को सुलझाने का प्रयत्न करते हुए उत्तन के लोगों के साथ आयुक्त शिवमूर्ति नाईक को ज्ञापन दिया था। कई माह बीत जाने के बाद भी उसका कोई हल निकलता न देख सांसद संजीव नाईक के साथ मिलकर मेंडोसाजी ने आयुक्त का घेराव किया तथा उन्हें किया हुआ वादा याद दिलाते हुए इस पर तुरंत कार्रवाई करके स्थानीय जनता को हो रही परेशानी से निज़ात दिलाने को कहा। आयुक्त ने केमिकल प्रक्रिया से कचरे को दुर्गंध मुक्त करने का वादा करते हुए लोगों को हो रही परेशानी से जल्द निज़ात दिलवाने का भरोसा दिलाया। मनपा प्रशासन इस समस्या से लोगों को जल्द निज़ात दिलाये नहीं तो कचरे की सड़ांध से लोगों के जानलेवा बीमारियों का शिकार होने की संभावना बनी हुई  है।

 

 

`हिंदी का वैश्विक परिदृश्य' पर व्याख्यान का आयोजन

मुंबई : हिंदुस्तानी प्रचार सभा संचालित महात्मा गांधी मेमोरियल रिसर्च सेंटर की ओर से जापान से पधारे टोकियो विश्वविद्यालय के हिंदी के प्रोफेसर डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण का `सभा' में `हिंदी का वैश्विक परिदृश्य' पर व्याख्यान आयोजित किया गया।
डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण ने जापान की विकसित अर्थव्यवस्था की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस देश ने शीर्ष पर पहुंचने के लिए महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुकूल हिंदुस्तानी के शिक्षण की शुरुआत की। वहां हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं की शिक्षा दी जाती है। पाठ्यक्रम में पाकशास्त्र और नाट्यशास्त्र भी सम्मिलित हैं। साथ ही अन्य भारतीय और विदेशी भाषाएं भी सिखायी जाती हैं।
डॉ. ऋतुपर्ण ने `ध्वनियों के आलेख', `ग़लती मेरी ही थी' और `हिरोशिमा की याद' कविताएं सुनाकर काव्य-रसिकों को भावविभोर कर दिया। अध्यक्ष पद से `सभा' के मानद सचिव सुभाष संपत ने डॉ. ऋतुपर्ण के व्याख्यान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जापान का भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिचय देकर उन्होंने श्रोताओं को पूरे जापान का भ्रमण करा दिया। उन्होंने जापान में अत्यंत लोकप्रिय हिंदी शिक्षण की समुचित व्यवस्था पर डॉ. ऋतुपर्ण को बधाई दी।
अतिथियों का स्वागत करते हुए `सभा' की मानद शोध निदेशक डॉ. सुशीला गुप्ता ने डॉ. ऋतुपर्ण की हिंदी-निष्ठा और काव्य-प्रतिभा पर रोशनी डाली।
कार्यक्रम के अंत में `सभा' के उर्दू रिसर्च आफ़िसर जनाब मुहम्मद हुसैन परकार ने आभार प्रकट किया।

संजय दत्त कांग्रेस के मुख्य मीडिया समन्वयक नियुक्त
- नूतन सवेरा संवाददाता

मुंबई : कांग्रेस की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विधान परिषद सदस्य संजय दत्त को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य मीडिया समन्वयक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे की ओर से की गयी है। इस ज़िम्मेदारी के तहत दत्त चुनाव के दौरान कांग्रेस की मीडिया संबंधी गतिविधियों की देखरेख करते हुए मीडिया के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।



पत्रकारों तथा लायंस क्लब के बुलेटिन एडिटरों का सम्मान

मुंबई : लायंस इंटरनेशनल जिला ३२३ ए३ की `प्रेस तथा मीडिया' समिति के अध्यक्ष लायन कन्हैयालाल घ. सराफ तथा `टिवनिंग' समिति के अध्यक्ष लायन सुभाष उदयपुरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक विशेष समारोह में `पत्रकारों तथा लायंस क्लब के बुलेटिन एडिटरों का सम्मान' किया गया।
`नवनीत' के संपादक विश्वनाथ सचदेव, `लेमन - टीवी' के अवनींद्र आशुतोष, `सहारा राष्ट्रीय न्यूज चैनल' के हरीश तिवारी, `नवभारत टाइम्स' के नंदकिशोर भारतीय, `एनडीटीवी' के सुनील सिंह, गुजराती के वरिष्ठ पत्रकार मकरंद शुक्ल, `मराठी सामना' के संजय डहाले, `व्यापार हिंदी तथा गुजराती' के संपादक शिरीष मेहता, `दोपहर का सामना' के स्तंभकार महेश दुबे, अंशकालिक संवाददाता अजय सिंह, प्रेस फोटोग्राफर अर्जुन कांबले, `आपकी आवाज' के अंजान गोस्वामी, `हुड्डा टाइम्स' के अब्दुल कयूम शेख तथा सिंधी अखबार `हिंदू' के बिहारी शहरी सहित इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया से जुड़े १४ पत्रकारों को शाल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
२८ क्लबों की बुलेटिनों का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। ज़िले की बुलेटिन संपादिका राजी ग्रेवाल और सरस्वती शंकर तथा ४० से अधिक क्लब बुलेटिन एडिटरों का सम्मान किया गया।
लायन सुभाष उदयपुरी ने स्वागत, लायन कन्हैयालाल घ. सराफ ने कार्यक्रम का संचालन तथा लायन जोगिंदर कौर ने आभार व्यक्त किया। सुश्री दिव्या उदयपुरी ने `गणेश वंदना', लायन विकास क. सराफ ने `हिंदी वंदना' और लायन शिवराज रांका ने `सरस्वती वंदना' प्रस्तुत की। लायन हुसैन साबूवाला ने कार्यक्रम संयोजन तथा संचालन में सहयेाग किया।

सावधान की नयी कार्यकारिणी गठित

मुंबई : १९८३ में स्थापित मुंबई की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था सावधान की नयी कार्यकारिणी का गठन रविवार, ६ सितंबर को संस्था की २६वीं वार्षिक सर्वसाधारण सभा में किया गया। इसके अनुसार विनोद गुप्ता (संस्थापक-अध्यक्ष), अश्विनी कुमार मिश्र (कार्याध्यक्ष), देवेंद्र शुक्ला तथा अशोक चौहान (उपाध्यक्ष), विजय शंकर दुबे (महामंंत्री), गुणानंद झा (कोषाध्यक्ष), वासंती पिसे (मंत्री-महिला प्रमुख), विवेक भाटकर (संगठन मंत्री), वेरसिंह देवरिया तथा शंभू सक्सेना (मंत्री) तथा नेमीचंद शर्मा, संतराम पांडेय, मीरा नागपुरवाला, एडवोकेट अरुण सिंह, वल्लभ झवेरी, पवन ओझा, ओमप्रकाश अग्रवाल, कपिलदेव खरवार (प्रचार मंत्री), सरोज दुबे तथा जयप्राकश सिंह को कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है। सावधान की वार्षिक सर्वसाधारण सभा चेंबूर के महाराणा होटल में बच्चूभाई चौहान स्मृति सभागृह में संपन्न हुई।
कार्यकारिणी के गठन के अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवक मधुकर देसाई, शिक्षाविद अविनाश तांबे, विधायक सदा लोखंडे ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। यह जानकारी सावधान के महामंत्री विजय शंकर दुबे ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।

 


आचार संहिता में लटका शिव वड़ा पाव तथा कांदा-पोहा
-विशेष प्रतिनिधि

मुंबई : शिवसेना चुनाव के पूर्व अपने कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए शिवसेना ने घोषित की शिव-वड़ा पाव की योजना तथा उसे जवाबी प्रस्तावित कांदा पोहा की कांग्रेसी योजना फिलहाल आचार संहिता में अटक गयी है। चुनाव के बाद इसे बढ़ावा मिलेगा, लेकिन उम्मीद है कि नेताओं के परिवार तथा समर्थकों तक सीमित रहेगी।

 

 शिवसेना-भाजपा युति ने बड़े जोर-शोर से २१५ अन्नदाता आहार केंद्र और शिव वड़ा पाव योजना घोषित की। इसमें ११५ स्टॉल शिव वड़ा के हैं। मुंबई के २४ वार्ड कार्यालयों से हज़ारों आवेदन आने के बाद इसका महत्व और बढ़ गया। शिवसेना के पदाधिकारी तथा नगरसेवकों ने अपने रिश्तेदारों और समर्थकों के नाम पर इसे हड़पने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। शिवसैनिकों को लगा कि कम से कम एक स्टॉल मिल जायेगा और रोजी रोटी चलेगी। मनपा ने अवेदन तो जमा कर लिये हैं, अब उसका पिटारा चुनाव खत्म होने के बाद ही खुलेगा। शिवसेना के शिव वड़ा पाव को प्रत्युतर देते हुए कांग्रेस ने कांदा पोहा का शिगूफा छोड़ा। मनपा के विरोधी पक्ष नेता राजहंस सिंह ने इसका प्रस्ताव मनपा की स्थायी समिति और मनपा सदन में लाने के लिए प्रयास किया। शिवसेना ने कांदा पोहा के महत्व को समझते हुए इस पर चुनाव बाद चर्चा का प्रस्ताव रखा है,

जिससे कांदा पोहा के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा। आज मुंबई शहर में बेरोज़गारों की संख्या लाखों में है और २००-३०० स्टॉल के लिए योजना बनाकर मनपा बेरोज़गारों की भावनाओं से खेलने का काम कर रही है। मुंबई के फेरीवालों की समस्या को सुलझाने में असफल रही मनपा अब बवाल क्यों सिर पर ले रही है? यह बात समझ से परे है। पहले फेरीवालों की समस्या सुलझाने के बजाय मनपा की यह बेमतलबवाली कसरत फिजूल खर्ची और राजनीति से प्रेरित लगती है।


 कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति प्रभारी सुशील कुमार शिंदे पिछली सफलता दोहरायेंगे!
- नूतन सवेरा संवाददाता


मुंबई : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और पूर्व मुख्य मंत्री सुशील कुमार शिंदे को चुनाव प्रचार समिति का प्रभारी बनाया है। लोकसभा चुनाव में भी शिंदे को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी और उस ज़िम्मेदारी का उन्होंने कितनी सफलतापूर्वक निर्वहन किया यह लोकसभा चुनाव के नतीजों से पता चलता है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपेक्षानुरूप प्रदर्शन किया था। एक चुनाव प्रचार-प्रभारी के तौर पर शिंदे की काबिलियत पर कोई शक नहीं है, क्योंकि वह कांग्रेस के समर्पित सिपाही हैं। महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेताओं में उनका भी नाम है। वह शरद पवार के समय से कांग्रेस में हैं, लेकिन जब पवार ने कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनायी तो शिंदे ने कांग्रेस में ही रहना पसंद किया। हालांकि उनका झुकाव शरद पवार की तरफ माना जाता रहा है।
शिंदे पहले ऐसे दलित नेता हैं जिन्हें महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इससे कांग्रेस दलितों में अपने टूटते विश्वास को कुछ हद तक बचाने में सफल रही है। अब जब उन्हें चुनाव प्रचार की कमान थमा दी गयी है, तो कांग्रेस यह चाहती है कि उसके दलित मतदाताओं में यह संदेश जाये कि कांग्रेस उनकी भी पार्टी है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार समिति प्रभारी नियुक्त होने पर शिंदे ने कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यालय गांधी भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह बात बड़ी मज़बूती के साथ कही कि पार्टी हाई कमान ने मुझमें जो विश्वास जताया है उस पर खरा उतरना और जो ज़िम्मेदारी सौंपी है उसे सफलतापूर्वक निभाना मेरी प्राथमिकता होगी। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि चुनाव प्रचार प्रभारी के तौर पर आप लोगों से यह मेरी पहली मुलाकात है और चुनाव का परिणाम आने तक आप लोगों से मेरी मुलाकात होती रहेगी।
बतौर चुनाव प्रचार प्रभारी शिंदे पर तीन महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां होंगी। पहली महाराष्ट्र के सभी मतदाताओं को कांग्रेस के पक्ष में करने और पार्टी के कार्यों और विचारों को उन तक पहुंचाना। दूसरी ज़्यादा से ज़्यादा दलित मतदाताओं को कांग्रेस के पक्ष में करना और तीसरी ज़िम्मेदारी जो उनपर डाली गयी है वह यह कि दलित नेता रामदास आठवले को कांग्रेस के पक्ष में करना। आठवले को मनाने के लिए कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे, मुकुल वासनिक और जयंत आवले जैसे दलित नेताओं की एक समिति गठित की है।
मुंबई, ठाणे, पुणे, नाशिक, शोलापुर और नागपुर से लेकर विदर्भ तथा मराठवाड़ा तक दलित मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है। शिंदे को इन मतदाताओं तक प्रचार के माध्यम से पहुंचना है और उन्हें कांग्रेस के पक्ष में साधना है।
गांधी भवन में पत्रकार वार्ता के दौरान बातचीत में शिंदे ने संकेत दिये थे कि यह चुनाव वह विकास के मुद्दे पर लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में भाजपा की स्थिति जर्जर है और कांग्रेस भारत की प्रगति की वाहक है। महाराष्ट्र की जनता जानती है कि कांग्रेस ने प्रदेश में जितना विकास किया उतना किसी पार्टी ने नहीं किया। इसलिए जनता कांग्रेस के पक्ष में है। फिर कांग्रेस एक सर्वधर्म समभाव की विचारधारावाली पार्टी है और मेरा विश्वास है कि धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करनेवाले दल कट्टरवादी ताकतों को परास्त करने में कांग्रेस का सहयोग करेंगे। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि कांग्रेस में उम्मीदवारी के लिए बढ़ रही संख्या यह दर्शाती है कि कांग्रेस में आनेवाला शख्स जीतनेवाला है और महाराष्ट्र में कांग्रेस फिर सरकार बनानेवाली है।



देशमुख चुनाव प्रबंधन समिति के मुखिया
- नूतन सवेरा संवाददाता

मुंबई : केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री तथा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री विलासराव देशमुख को अगले माह होनेवाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रबंधन समिति का मुखिया नियुक्त किया गया है।


पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने देशमुख को चुनाव प्रबंध समिति का अध्यक्ष बनाया है। इसी वर्ष अप्रैल-मई माह में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में भी देशमुख को चुनाव प्रबंधन समिति के मुखिया की महती ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था और कांग्रेस ने १७ लोकसभा सीटें जीतते हुए शानदार सफलता हासिल की थी। कांग्रेस को उम्मीद है कि एक बार फिर देशमुख अपने कुशल प्रबंधन का चमत्कार दिखाते हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गत बार की अपेक्षा ज़्यादा सीटें जितवाने में सफ़ल होंगे। इस काम में उन्हें राज्य के दूसरे पूर्व मुख्य मंत्री, वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री तथा दलित नेता सुशील कुमार शिंदे का भी अच्छा साथ मिलेगा, जिन्हें चुनाव प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया है।

युवा कलाकार धीमंत वर्मन का आकर्षक सितारवादन

मुंबई : भारतीय सांस्कृतिक संबंध केंद्र (आइसीसीआर) की ओर से ४ सितंबर को मुंबई के युवा सितारवादक धीमंत वर्मन का मधुर कार्यक्रम ``होराइज़न'' शृंखला के अंतर्गत मुंबई के एनसीपीए सभागार में आयोजित किया गया। भारत सरकार के भारतीय सांस्कृतिक संबंध केंद्र के प्रभाग निदेशक टेरेंस डिसूज़ा ने इस अवसर पर बताया कि आइसीसीआर देश के चुने हुए प्रतिष्ठित कलाकारों के कार्यक्रम देश-विदेश में आयोजित करता रहता है और युवा कलाकारों को भी प्रोत्साहित करता है। सुप्रसिद्ध सितारवादक पंडिज राजेंद्र वर्मन के पुत्र तथा शिष्य धीमंत वर्मन ने राग गावती में मुश्किल बंदिशों को भी बहुत सुगमता से प्रस्तुत किया। बाद में राग पहाड़ी बजाकर धीमंत वर्मन ने ``जाफ़र खानी बाज़'' का अंदाज पेश किया, जो श्रोताओं को बहुत पसंद आया। तबले पर युवा कलाकार अमित चौबे ने धीमंत के साथ अच्छी संगत की। इस अवसर पर जाफ़र खानी बाज़ के आविष्कारक, विश्वविख्यात सितार वादक पद्मभूषण उस्ताद अब्दुल हलीम ज़ाफर ख़ां ने युवा कलाकार धीमंत वर्मन को आशीर्वाद दिया।



कांग्रेस-राकांपा गठबंधन कायम
भितरघात से सावधान!
- राजकुमार आनंद


मुंबई : आखिर काफी रस्साकसी के बाद कांग्रेस और राकांपा में समझौता हो गया। कांग्रेस और राकांपा के बीच बनी सहमति ने उन नेताओं की उम्मीदों पर घड़ों पानी फेर दिया है, जो विधानसभा चुनाव लड़ने का सपना पाले बैठे थे। ऐसे में इन दोनों पार्टियों के लिए एक बात थोड़ी नुकसानदायक हो सकती है, वे हैं ऐसे महत्वाकांक्षी नेता, जिनको टिकट नहीं मिला या मिलने के बाद कट गया, वे अपनी पार्टी से बगावत कर सकते हैं और ऐसी पार्टियों के खेमे में जा सकते हैं, जिन्हें उम्मीदवारों की तलाश है। वैसे भी रिपब्लिकन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में शामिल समाजवादी पार्टी सहित अन्य कई पार्टियां मज़बूत जनाधारवाले उम्मीदवारों की तलाश कर रही हैं। ऐसे उम्मीदवार इन पार्टियों में जाकर कांग्रेस और राकांपा को कुछ नुकसान ज़रूर पहुंचा सकते हैं। फिर इन पार्टियों के बडे नेताओं के समर्थक भी टिकट की कतार में हैं।
फिलहाल इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि कांग्रेस और राकांपा के मिलकर चुनाव लड़ने से आघाड़ी की स्थिति युति के मुकाबले मज़बूत है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह यह विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ेगी। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां आतंकवाद, महंगाई, पानी, सड़क और बिजली का मुद्दा उठायेंगी। इनमें भी प्रमुखता आतंकवाद और महंगाई के मुद्दों की होगी, लेकिन यहां यह बताना ज़रूरी है कि मुंबई में हुए ९/११ और राज्य में हुइंर् अन्य आतंकवादी घटनाओं का इन चुनावों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा,क्योंकि इन घटनाओं को हुए काफी समय बीत चुका है। वैसे भी मुंबई की जनता का मानस ऐसा है कि वह ऐसी घटनाओं को भुलाने में देरी नहीं करती। दूसरी बात यह कि ऐसी घटनाएं किसी भी सरकार के शासन में हो सकती हैं। रहा महंगाई का मुद्दा तो इस पर कांग्रेस और राकांपा विपक्षियों को जवाब दे सकती हैं कि आज महंगाई की समस्या केवल भारत की ही नहीं है, बल्कि यह समस्या विश्वव्यापी बन चुकी है। विश्व के कई देश इस समस्या से जूझ रहे हैं। वैसे भी इस समस्या से लड़ने और दूर करने में वही सरकार सक्षम होगी, जिसमें योग्य नेता होंगे। वर्तमान में कांग्रेस में ऐसे नेता मौजूद हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि हाल में गुजरात, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा के उप चुनाव में भाजपा फायदे में रही है और इसका थोड़ा-बहुत असर महाराष्ट्र के चुनाव पर भी पड़ेगा, लेकिन आमतौर पर यह देखा गया है कि उपचुनावों का विधानसभा चुनावों पर कोई खास असर नहीं पड़ता। वैसे भी उपचुनाव का नतीजा किसी भी राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में ज़्यादा होता है।
महाराष्ट्र का किला फतह करने के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। मुंबई प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय का उद्घाटन करने आयीं सोनिया गांधी ने चुनाव प्रचार का शंखनाद कर दिया है। कांग्रेस के जिन सिपहसालारों पर रणभूमि जीतने की ज़िम्मेदारी है, उसमें मुख्य मंत्री अशोक चव्हाण, पूर्व मुख्य मंत्री मौजूदा चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विलासराव देशमुख और चुनाव प्रचार समिति के प्रभारी सुशील कुमार शिंदे, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे, नारायण राणे और मुंबई प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह प्रमुख हैं।
कांग्रेस ने चुनावी चक्रव्यूह को भेदने के लिए बड़ी सूझबूझ के साथ रणनीति बनायी है। जहां दलित मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की ज़िम्मेदारी उसने दलित नेता सुशील कुमार शिंदे को सौंपी है, वहीं मराठी मतदाताओं को अशोक चव्हाण और विलासराव देशमुख रिझायेंगे। उत्तर भारतीय मतदाताओं को अपने पक्ष में कृपाशंकर सिंह लायेंगे तो कोंकण में डंका बजाने का काम नारायण राणे के हवाले है। बाकी जो थोड़ी बहुत कसर रहेगी उसे प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे पूरा करेंगे।
फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और महासचिव राहुल गांधी के अलावा पार्टी के आला दर्जे के नेता चुनाव प्रचार में मतदाताओं को अपनी तरफ करने की जी तोड़ कोशिश करेंगे। वैसे भी सोनिया-राहुल का जादू आजकल लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है। राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार, प्रदेश अध्यक्ष आरआर पाटिल और महाराष्ट्र के उपमुख्य मंत्री छगन भुजबल चुनावी रणनीति सफल बनाने में जुटे हैं। वहीं शिवसेना के कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे अपने गढ़ को मनसे से सुरक्षित रखते हुए ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीतने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव माहौल के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कांग्रेस सरकार के विरोध में `आघाड़ी ने किया क़ानून व्यवस्था का सत्यानाश' नाम से एक किताब निकाली है। जिसमें २६/११ के आतंकी हमले में शहीद पुलिस अफ़सरों हेमंत करकरे, अशोक काम्टे और विजय सालस्कर की शहादत के लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। उनका यह चुनावी स्टंट कितना कामयाब होगा यह तो चुनाव परिणाम ही बतायेंगे।

 

अंतिम अद्यतन ( बुधवार, 21 अक्टूबर 2009 16:03 )
 


Another articles:


Sarovar Portico

श्री नंद किशोर नौटियाल जी

 

Polygon

Hindi Media

Polls

बढ़ती नक्सली हिंसक वारदातों के लिए ज़िम्मेदार कौन?