नयी दिल्ली। बेलगाम और मराठी का मुद्दा रह रहकर सामने आ ही जाता है और इसे लाने का श्रेय राजनेताओं को ही जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में हुई भारी बहस के बावजूद शिवसेना इस मुद्दे को भुनाने से बाज नहीं आ रही है। लोकसभा में शुक्रवार, 27 अगस्त को उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गयी, जब कर्नाटक के बेलगांव सहित मराठी भाषी क्षेत्रों पर उठे विवाद में न केवल विपक्षी राजग के दो सहयोगी दल भाजपा और शिवसेना आपस में भिड़ गये, बल्कि खुद भाजपा के भीतर भी विभाजन हो गया।






